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ANANDAKRISHNAN EDACHERI

Thriller

4  

ANANDAKRISHNAN EDACHERI

Thriller

वर्षा महोत्सव

वर्षा महोत्सव

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सारे नभ में मेघ बिछा कर

 नक्षत्रों को लटकाया ।

वन फूलो को खूब सजाकर 

लतिकाओ को संवारा

हरित तृणों की झाड़ू से झट

 सारी धरती स्वच्छ रखी

मानव दानव मिलकर भू पर

 नर्तन मंडप बनवाया

जानवर भॅवर भेड बकरियाँ

 गश्त पडे पग पल पल में 

ताले नाले जलाशयों में

 मछली मगर भी कूद पडे 

छोटे छोटे पेडों की नव

 शाखाओं में उड उड कर 

फूल खोजकर जानेवाली

 रंग बिरंगी तितली भी

आसमान की तैयारी को

 देख खुशी से मस्त हुई ।

वर्षा का नव तरल महोत्सव

 भूतल में हाहाकार है . 

सर्व चराचर बैठ खुशी से

 वर्षा को अपनाते है ।

बादल का यह उत्सव है,

 पक्षी का जीवोत्सव है

पत्तों को फिर हर पौधों को

 नव जीवन का मंत्रण है।


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