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Shoumeet Saha

Drama

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Shoumeet Saha

Drama

वक़्त

वक़्त

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वक़्त की ऐसी दास्तान है की 

ये किसी के लिए नहीं रूकता,


कांटें इसके बड़े बे-रेहम होते हैं जनाब,

हर मसले को सुलझाने के लिए 

काफी नहीं होते,


हर लम्हा एक नया खेल रच जाते हैं ये,

हर एक दिन जैसी एक नयी चुनौती लाता है,


उस चुनौती से न डर तू,

ये तो आती रहेगी बार-बार,

उस पल का खौफ कर 

जिस में तू अपनी हार मान लेता है,


न रोक सकता है इसे कोई,

न कोई टोक पायेगा,

आज़माती रहेगी ये तुझे हर रोज़,

न इस के खेल से कोई बच पायेगा,


हर गुज़रा पल महफ़ूज़ रख तू 

अपने दिल पे ए दोस्त,

वक़्त तेरा जो बीत जाये एक बार 

वह फिर नहीं लौट आएगा...।


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