STORYMIRROR

Mr. Akabar Pinjari

Romance

4  

Mr. Akabar Pinjari

Romance

वफ़ा की चिंगारी

वफ़ा की चिंगारी

1 min
280

आज़ादी चाहिए कुछ जंजीरों से मुक्त होने की,

बंदिशों को को तोड़ कुछ कर गुजर जाने की।


कुछ सवाल आज भी सताते है मुझको यूं ही,

एक घड़ी चाहिए कुछ जवाब दे जाने की।


साजिशों के तीर यूं ना चलो हम पर,

इतना गुरूर ना कर इस मिट्टी के घर पर,


बेहतर ही लगते हैं बेवफाई के खंजर दिल पर,

अब आ गई है घड़ी हादसों से हाथ मिलाने की,


महफूज़ है तेरी वफ़ा की चिंगारी मेरे सीने में,

खामखां परेशां न हो जाया कर तू बरसात के महीने में, 


तू पहली हसीना नहीं है,

गलतफहमियों का शिकार हो जाती हो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance