STORYMIRROR

सोनी गुप्ता

Abstract

4  

सोनी गुप्ता

Abstract

वो तारा

वो तारा

1 min
385

मैं

वो तारा

जो पल पल

चमकता रहता हूँ

कम रोशनी से ही सही

बहुतों को रोशन कर जाता हूँ

मुझे कम ना समझो तुम मुझ में भी बहुत कुछ अच्छा है

हर मुश्किल परिस्थितियों में भी हमेशा मुस्कुराता हूँ 

मैं वह तारा हूँ जो पल पल चमकता रहता हूँ

मुझे देख कर तुम ना जाने कितनी बातें

कर लेते हो मुझे देखकर हंसते मुझे देख कर 

रो लेते हो ना जाने कितने सफर साथ बिताए हमने

कितनी रातों को अकेले तुमने दिल की बातें की है हमसे

मुझे देख कर तुम अपनों को 

दिल से याद कर लेते हो

मैं वह तारा हूँ

जो हरपल 

साथ

हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract