STORYMIRROR

Amit Kumar

Romance Inspirational

4  

Amit Kumar

Romance Inspirational

वो पल

वो पल

1 min
160

जाने कहाँ खो गये

कहीं आंख मूँदकर सो गये

वो पल जो गुजरे थे

तुम्हारी जुल्फों की छांव में

उस अमवां के गांव में

वो कोयल की हूक करती कूक में

वो सोंधी सी चूल्हे की फूँक में

जहाँ अलाव जला करता था

आँचल के पल्ले से गर्म पतीला पकड़ा करता था

होंठों की प्यास जहाँ मासूम पोखरों से होती हुई

नदी तालाबों से भरती थी

जहाँ गांव की अल्हड़ पनिहारीन

कच्ची मुंडेर पर चला करती थी

जहाँ समय का पहिया दिन रात घूमा करता था

दुःख दर्द मिलकर सब सहते थे

इंसान -इंसान बनकर ही मस्ती में झूमा करता था

अब वो पल बस यादों में ही रह गये है

बड़े बुजुर्ग आने वाले श्रावण बस यही कह गये है

जीयो हर पल को उम्मीद से ज़्यादा

तभी मिलेगा तुम्हें भी कुछ अलहदा

उम्मीद से बढ़कर सोच से ज़्यादा.......

            


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance