STORYMIRROR

Dr pratap Mohan Bhartiya Bhartiya

Romance

4  

Dr pratap Mohan Bhartiya Bhartiya

Romance

आपकी याद आई

आपकी याद आई

1 min
222

आपकी याद आई

अभी कुछ पल पहले

तेरा जिक्र हुआ

मेरी आंख भर आई

आपकी याद आई

     

तू तो बसी है

हमारे दिल में

तेरी याद आती है

पल पल में

     

क्यों चली जाती हो दूर

मुझे अकेला छोड़कर

मेरा घर मेरा आँगन

और मुझे अकेला छोड़कर

     

जब जब सावन की घटा छाई

फूल और कलियाँ मुस्कराई

देखकर रिमझिम बारिश को

मुझे तेरी याद आई

     

जिंदा हूँ तुम्हारी यादों के सहारे

दिन गुजार रहा हूँ 

तुम्हारी बातों के सहारे

     

सारा दिन रहता हूँ

तेरी याद में खोया

रात की नींद गायब है

कई दिन से नहीं सोया

     

अब यादों से बाहर निकलो

मिलने चली आओ

अपने प्रियतम को

ज्यादा न सताओ!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance