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Swati ankan

Romance

4  

Swati ankan

Romance

वो पहली मुलाकात,

वो पहली मुलाकात,

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 वो पहली मुलाकात,
वो बात,
उस नायाब लम्हे की
ज़ुस्तज़ू आज भी है।

उन चंद पनाहों ने,
जिंदगी गुजार दी,
उसी तरबियत की
ख्वाहिश आज भी है।

तफ़तीश कर लूं,
हर उस मंज़िल की
जिसके हमसफ़र 
हम आज भी हैं।
    


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