वो मेरी तकदीर बन गए
वो मेरी तकदीर बन गए
कुछ ऐसा हुआ कि वो मेरी तकदीर बने जाते हैं ,
हाथ उन्होंने जबसे थामा मेरे हमसफ़र कहलाते हैं!
ज़ब कभी मेरी सपनीली आँख बंद होती है तो,
सिर्फ़ उनके ही ख्वाब हर एक जगह नज़र आते हैं!
अब यह एक बात कुछ दीगर सी हो गई है कि,
कुछ हमारे जैसे खैरख़्वाह भी कहीं नवाज़े जाते हैं!
उनकी याद ज़ब कभी आती है तो कुछ एक लम्हें,
इश्क की रानाई बनकर मेरे गालों पर बिखर जाते हैं!
करु लूँ चाहे कितने जतन चाहे लाख कोशिश कर लूं,
दिल नहीं मानता, ये कदम उनकी ओर ही बढ़ जाते हैं!
यूँ तो मेरे आँसू,जख्म,दर्द,सब फ़क़त उनकी सौगात हैं,
पर एक उनका नाम जुबां पर आते ही हम संवर जाते हैं!

