STORYMIRROR

Minati Rath

Abstract

4  

Minati Rath

Abstract

वो आंखें

वो आंखें

1 min
419

कुछ तो बात है उन आंखों में

जो खींच लाती है 

हर आंखों को

अपने ही तरफ


नशा तो है नहीं

कुछ दर्द है अनकही

बीते हुए लम्हों की

कुछ है मिठास

एक मधुर पल की


वो हैं गवाह हर एक मुश्किल की

करीब से जो देखे हैं 

टूटते हुए सपनों को

खोते हुए अपनों को


संभाल कर जो रखे हैं

तड़पती हुई चाहत को

अंधेरे में जो देखे हैं

दिल की हर एक आहट को


आंसुओं को भी रोका है

बने सबका भरोसा है

हर आंखों को खींच लाती है

दिलासा सबको देती हैं

कुछ तो बात है ज़रूर

उन समंदर जैसी आंखों में ।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract