वो आंखें
वो आंखें
कुछ तो बात है उन आंखों में
जो खींच लाती है
हर आंखों को
अपने ही तरफ
नशा तो है नहीं
कुछ दर्द है अनकही
बीते हुए लम्हों की
कुछ है मिठास
एक मधुर पल की
वो हैं गवाह हर एक मुश्किल की
करीब से जो देखे हैं
टूटते हुए सपनों को
खोते हुए अपनों को
संभाल कर जो रखे हैं
तड़पती हुई चाहत को
अंधेरे में जो देखे हैं
दिल की हर एक आहट को
आंसुओं को भी रोका है
बने सबका भरोसा है
हर आंखों को खींच लाती है
दिलासा सबको देती हैं
कुछ तो बात है ज़रूर
उन समंदर जैसी आंखों में ।
