वक्त (गजल)
वक्त (गजल)
वक्त को यूं ही उड़ाना अच्छा नहीं होता,
मौके से हाथ गंवाना अच्छा नहीं होता।
हार जीत तो खेल है जिंदगी का,
दिल में कभी ऐसी बात लगाना अच्छा नहीं होता।
चाहते हो जिंदगी में अगर चैन
सुदर्शन, तो चाहतों को दबाना अच्छा नहीं होता।
खुश मिजाज रहो हर पल हर घड़ी,
अपने आप को गमों में दर्शाना अच्छा नहीं होता।
माना की रात को उजाला नहीं दिखता पर मन का सूरज
डुबाना अच्छा नहीं होता।
देखना चाहते हो खुदा को इस जहां में अगर सुदर्शन,
तो मां को भूल जाना अच्छा नहीं होता।
पाना चाहते हो अगर मंजिल जिंदगी में तुम तो
मुश्किलों को देखकर घबराना अच्छा अच्छा नहीं होता।
