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sargam Bhatt

Abstract Romance Action

4  

sargam Bhatt

Abstract Romance Action

प्यार

प्यार

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प्यार को बाजार में बिकते नहीं देखा,

समंदर की लहर को रुकते नहीं देखा,

खुलकर हंसना भी एक तजुर्बा है,

नदियों के किनारों को कभी हंसते नहीं देखा।


यह उलझनें तुम्हें कभी हंसने नहीं देंगी,

तुम्हारी मंजिल को तुम्हें मिलने नहीं देंगी,

यह बेरहम दुनिया दिल तोड़ देगी,

मगर तुम्हारे प्यार को मिलने नहीं देगी।


तुम्हारा प्यार भी अधूरा रह जाएगा,

तुम्हारा ख्वाब भी पूरा ना हो पाएगा,

खुद पर रखो विश्वास यारा,

वरना उम्मीद भी साथ छोड़ जाएगा।


प्यार में जवां दिल बालिग नहीं होते,

गिले-शिकवे शिकायतें वाजिब नहीं होते,

कभी गम तो कभी खुशियों का बौछार होता है,

यूं ही लोग प्यार के काबिल नहीं होते।


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