Chetan Chakrbrti
Tragedy
तुमसे बात करने की कोई वजह नहीं बची,
मुलाक़ात क्यूँ करे कि कोई वजह नहीं बची।
अब तुम्हारे प्रति कोई संवेदना नहीं बची,
जज्बात मर चुके हैं कि कोई वजह नही बची।।
मेरें शब्द
दिल की बात
आज़ादी
कुछ मुक्तक
मेरा इल्म
प्रकृति
कल्पना होली
बेमतलब
वजह
अच्छा या बुरा
जो मिले थे गुल कहीं खिले, वो स्वप्न सब धूल में मिले। जो मिले थे गुल कहीं खिले, वो स्वप्न सब धूल में मिले।
क्यों कहें निज हस्त खुद को, मौत मुंह में टाँगते हैं ? क्यों कहें निज हस्त खुद को, मौत मुंह में टाँगते हैं ?
मैं तेरी-मेरी बातों के, अल्फ़ाज़ ही वापस लेती हूँ। थक आज गयी हूँ मैं इतना, कि थकान भी वापस लेती हूँ... मैं तेरी-मेरी बातों के, अल्फ़ाज़ ही वापस लेती हूँ। थक आज गयी हूँ मैं इतना, कि थ...
व्यभिचारी भी क्या आखेटक नहीं? मासूम बच्ची को बना शिकार हवस का। व्यभिचारी भी क्या आखेटक नहीं? मासूम बच्ची को बना शिकार हवस का।
पड़ी रहती हूँ घरों में एक सजावट की वस्तु बनकर। पड़ी रहती हूँ घरों में एक सजावट की वस्तु बनकर।
तड़पने वाले को उसके हाल पर छोड़कर निकल जाता हूँ मैं कुछ रूह का हिस्सा दफना कर आ जाता हू तड़पने वाले को उसके हाल पर छोड़कर निकल जाता हूँ मैं कुछ रूह का हिस्सा दफना कर ...
हे ब्रह्मदेव ! तुम नहीं जानते कितना कठिन होता है। हे ब्रह्मदेव ! तुम नहीं जानते कितना कठिन होता है।
अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर। अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर।
और कर रहे हैं शर्मिंदा सच को, झूठ के झुंड में। और कर रहे हैं शर्मिंदा सच को, झूठ के झुंड में।
हां दर्द दिल में उठता है..कैसे कह देते हो तुम फिर भी मैं पराई हूं। हां दर्द दिल में उठता है..कैसे कह देते हो तुम फिर भी मैं पराई हूं।
जीवन इतना सरल नहीं जीवन इतना सरल नहीं
मुझे माफ़ करना पुष्प, मैं अपने दिल को समझा न पाया, तुम्हें तो पता ही होगा कि दिल के पास। मुझे माफ़ करना पुष्प, मैं अपने दिल को समझा न पाया, तुम्हें तो पता ही होगा कि द...
यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं। यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं।
उसकी देह पर दो फटे पुराने कपड़े थे हाथ में एक रोटी का टुकड़ा..। उसकी देह पर दो फटे पुराने कपड़े थे हाथ में एक रोटी का टुकड़ा..।
एक सवाल मेरा भी सुन लो मैं धरती की पुकार हूँ मैं जन्मी एक नन्ही सी जान इंसानियत पर। एक सवाल मेरा भी सुन लो मैं धरती की पुकार हूँ मैं जन्मी एक नन्ही सी जान ...
जब जाती हूं थक... तो निकल जाती हूं घर से बाहर। जब जाती हूं थक... तो निकल जाती हूं घर से बाहर।
नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अपना जीवन। नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अप...
नादां नारी.. वो तुम्हें बड़े प्यार से छलेगा और तुम उसके छल को प्यार समझोगी.. नादां नारी.. वो तुम्हें बड़े प्यार से छलेगा और तुम उसके छल को प्यार समझोगी....
पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है। पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है।
बस एक अजीब सी ख़ामोशी है यहाँ, एक ठहरा हुआ समय हो जैसे। बस एक अजीब सी ख़ामोशी है यहाँ, एक ठहरा हुआ समय हो जैसे।