वजह बेवजह
वजह बेवजह
वजह बेवजह सी
हमारी मुलाक़ात थी
दोस्ती की शुरूआत से
प्यार तक आ पहुँची
वजह बेवजह से यूँ ही
हमारा मिलना होता
तेरे काँधे पर मेरा सिर रखकर,
हाथों में हाथ लिए कई घंटों तक बैठना
वो पहाड़ों की ऊँचाई से
अधिक हमारे प्यार को भांपना
वो समंदर की गहराई की तरह
एक-दूजे की आँखों के झील में डूबना।
वो वजह बेवजह सी आख़री
मुलाक़ात बन गई हमारी
एक-दूसरे से मिलने की तड़प
अभी भी बरकरार है दिल में कहीं।

