विरह और वादा
विरह और वादा
संदेशा आया है,
सजनी ने बुलाया है
कि घर अब आओ तुम,
साजन जल्दी आओ तुम,
तुम बिन सावन पतझड़ लगता हैं।
साजन अब आओ तुम,
सुनो अब आओ तुम,
तुम बिन राते सूनी सूनी हैं,
वही वो चांदनी राते हैं,
वही रिमझिम बरसाते हैं,
पर विरह कीअग्नि में,
सजन बिन सजनी को
सब सूना सूना लगता हैं,
न तुम आते हो,
न संदेशे आते हैं,
विरह की अग्नि में,
हम यूँ ही जल जाते हैं
सुगंधित वायु हैं,
खिली फुलवारी हैं,
मुस्काते मुखड़ों में
छिपी पीड़ा सारी हैं
अब तुम आओ न,
सुनो तुम आओ न,
तुम बिन ये पल पल तन्हा तन्हा हैं
सजनी आता हूं,
उन सूनी रातो में,
तुम संग मुस्काता हूँ
ये ख्वाब आते हैं,
मुझे तड़पाते हैं,
तुम बिन साजन अधूरा है
पर भारत माँ का बुलावा हैं,
मुझे भी जाना है,
दुश्मन को मिटाना है,
मैं लौट के आऊंगा,
गले से लगाऊंगा,
यह साजन का सजनी से वादा हैं
हाँ, ये वादा हैं, मेरा ये वादा हैं।

