priyanka gahalaut
Classics Inspirational
इस से ज्यादा
और क्या होगा
किसी भाषा के
विलुप्त होने के लिए
के ज़ब अपनी मातृ भाषा
को सिखाने के लिए
अपने ही शहर में
प्रचार होडिंग लगने लगे !
मिलावट हो रही है
बाहर से लेकर
घर में
कुछ किताबों के वेंटीलेटर
पर पड़ी भाषा की
सांस टूटने लगे।
स्त्री पुरुष ...
सर्दी की धूप
सतरंगी आसमां
प्रेम कोपल
विलुप्त
मनौती के चुंब...
एहसास के फूलो...
अल्पविराम
सीता की अग्नि...
ब्लैकहोल
सबके करतल में हैं अपनी-अपनी नियति, अपने दृढ़-संकल्प अविरत परिश्रम से... सबके करतल में हैं अपनी-अपनी नियति, अपने दृढ़-संकल्प अविरत परिश्रम से...
माँ घट घट वासी माँ घट घट वासी
तुम मिटा सकते हो मुझे संवार नहीं सकते, तुम नज़र लगा सकते हो नज़र उतार नहीं सकते। तुम मिटा सकते हो मुझे संवार नहीं सकते, तुम नज़र लगा सकते हो नज़र उतार नहीं सकते...
और पर्वतों को राजकुमारी कैलाश को रानी बने जा रही है ।। और पर्वतों को राजकुमारी कैलाश को रानी बने जा रही है ।।
जब आकाश में श्री हरि को देखा गरुड़ पर आरूढ़, हाथ में चक्र लिए। जब आकाश में श्री हरि को देखा गरुड़ पर आरूढ़, हाथ में चक्र लिए।
लूट कर वो चोर मेरी, गाढ़ी कमाई ले गया। बावला सा चीखता- चिल्लता मैं दौड़ता गया ! लूट कर वो चोर मेरी, गाढ़ी कमाई ले गया। बावला सा चीखता- चिल्लता मैं दौड़ता...
भारत ही महाभारत होगा भारत ही महाभारत होगा
वह रईसी जी थी मैंने वह रईसी जी थी मैंने
क्योंकि इंसान का वज़ूद सिर्फ़ इंसान समझते हैं। क्योंकि इंसान का वज़ूद सिर्फ़ इंसान समझते हैं।
किसी आततायी के युग मे प्रेमी बन कर जीना किसी क्रांति से कम नहीं होता। किसी आततायी के युग मे प्रेमी बन कर जीना किसी क्रांति से कम नहीं होता।
सब सुफल मनोरथ काम वहाँ, शिव ब्रह्मा,विष्णु धाम वहाँ, मैं शिव के शरण में रहती थी! सब सुफल मनोरथ काम वहाँ, शिव ब्रह्मा,विष्णु धाम वहाँ, मैं शिव के शरण में रह...
शायद कलयुग का हो उद्धार डूबते युग समाज मे मानवता का हो कुछ कल्याण। शायद कलयुग का हो उद्धार डूबते युग समाज मे मानवता का हो कुछ कल्याण।
ललकारता बोला प्रमुख सर्वस्व अर्पण तुम करो। ललकारता बोला प्रमुख सर्वस्व अर्पण तुम करो।
आकाश में ध्रुव तारा बन कर, सदा के लिए अमर हो गया। आकाश में ध्रुव तारा बन कर, सदा के लिए अमर हो गया।
ख्वाबों की दुनिया से एक ख्वाब मैं ले आई अपनी जिंदगी के लिए एक मकसद मैं ले आई। ख्वाबों की दुनिया से एक ख्वाब मैं ले आई अपनी जिंदगी के लिए एक मकसद मैं...
आपके चरणों की रज माँगूँ नहीं चाहता कि मोक्ष पाऊं। आपके चरणों की रज माँगूँ नहीं चाहता कि मोक्ष पाऊं।
शीश पास जब पार्थ पड़े था दुर्योधन नयनों के आगे, श्रीकृष्ण ने बदली करवट छल से पड़े पार्थ शीश पास जब पार्थ पड़े था दुर्योधन नयनों के आगे, श्रीकृष्ण ने बदली करवट छल से प...
धर्मपुत्र भद्रश्रवा, भद्रशवा वर्ष में स्तुति करें भगवान वासुदेव की! धर्मपुत्र भद्रश्रवा, भद्रशवा वर्ष में स्तुति करें भगवान वासुदेव की!
शिव - पार्वती के विवाह का विस्तृत वर्णन करती हूँ आज। शिव - पार्वती के विवाह का विस्तृत वर्णन करती हूँ आज।
क्योंकि नवीनता जरूरी है विचारों और व्यवहार में। क्योंकि नवीनता जरूरी है विचारों और व्यवहार में।