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Dr.Rashmi Khare"neer"

Tragedy

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Dr.Rashmi Khare"neer"

Tragedy

विडंबना

विडंबना

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देश की हालत देखकर मन उदास सा है

हर मंजर देखकर 1947 के पहले का

मंजर नजर है


हर जगह मौजूद हैं अपने को साबित करते

लोग

हर जुबां कहती वो सही है


मैं सही मैं सही मेरे सिवा कोई कहीं नहीं

मारकाट कर लहू लुहान दिखाते लोग


ये कैसी विडंबना कहीं बहुत आगे निकल

आए थे

आज हम कैसे फिर बहुत पीछे आ गए है


आज हम सब में कमज़ोरी बैठी है

पर खुद को सबसे ताकतवर समझ रहे


क्रांति हुई थी आज़ादी के लिए

आज हम फिर ग़ुलाम हो गए है


कैसे हम अब आज़ाद हो पाएंगे

मानसिकता की गुलामी से



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