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Madhu Vashishta

Action Classics Inspirational

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Madhu Vashishta

Action Classics Inspirational

वह सदस्य

वह सदस्य

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 घर का वह सदस्य जो बह जाता है, कभी प्रेम में,
 कभी गुस्से में,
 कभी समाज के भय में ,
 कभी मान सम्मान की चाह में , कभी अवसाद में,
 कभी आत्मग्लानि में,
 कभी लालच में,
 कभी झूठी प्रशंसा के जाल में , जिसे सीमाएं तय करना नहीं आता, जो किसी सीमा में बंध नहीं पाता, उसका दुष्परिणाम पूरा घर है उठाता।
 आत्ममुग्ध सा वह ना तो किसी को अपना बना पाता,
 और ना ही मधु वह किसी का हो पाता।
 


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