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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

याद आते हैं वो लम्हें

याद आते हैं वो लम्हें

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यारों बहुत याद आते हैं वो लम्हें, 

यारों बहुत हर एक पल वो लम्हें। 

यारों प्रिय स्वर्गीय नाना-नानी थे,

याद आते वो हर पल हमें हमेशा। 


बीच वाले स्वर्गीय मामा-मामी थे, 

याद आते वो भी बहुत हमें सदा। 

नाना-नानी का प्रेम भी अनमोल, 

मामा-मामी का प्रेम अमूल्य सदा। 


दादा-दादी व चाची जी छोड़ गए, 

ताया-ताई जी नेक बड़े छोड़ गए। 

कम उम्र में भैया भी छोड़ के गए, 

अल्पायु में भाभी स्वर्ग सिधारी है। 


पिछले साल फरवरी सासु माँ भी, 

इस साल जनवरी में मौसी माँ भी। 

जवानी से बुढ़ापे की तरफ़ बढ़ना, 

कुछ रिश्तों ने सदा के लिए छोड़ा।


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