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ABHINAV TIWARI

Tragedy Thriller

4  

ABHINAV TIWARI

Tragedy Thriller

वेदना...

वेदना...

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वेदना मन में लिए, होंठों पे मुस्कान सजाता हूँ

इक उम्मीद के विश्वास में, जीवन जिये जाता हूँ।। 


कुछ प्रश्नों के उत्तर हैं, जो अभी नहीं मिल पाये हैं

कुछ जवाबों को संजोये, इंतज़ार किये जाता हूँ।। 


परिवर्तन की दहलीज़ पर खड़ा, जब समय आह्वान करता है

पलट अतीत को देखता हूँ, क्या कुछ छोड़े जाता हूँ।। 


फिर, समय को मात देकर, समय से लड़ा जाता हूँ

वेदना को मन में लिये, होंठों पर हँसी सजाता हूँ।। 


                       


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