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ABHINAV TIWARI

Romance

4  

ABHINAV TIWARI

Romance

आँसू

आँसू

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कुछ अधूरा सा रह गया वो, 

यूँ अश्कों सा बह गया वो। 


कुछ सपने मंज़िल दिखाते हैं, 

कुछ यूँ ही आँखें नम कर जाते हैं। 


कुछ साथ मे चलते रहते हैं, कुछ पीछे छूट जाते हैं, 

याद उन्हें जब करते हैं, आँखों मे आँसू आ जाते हैं। 


हम दर्द छुपाया करते हैं, हम तन्हाई से डरते हैं। 

पर कुछ जख्म अधूरे होते हैं, जो फिर घाव दे जाते हैं। 


जब चाहत यूँ बेपनाह हो, 

जब लब्जो मे ना वो बयां हो, 


तब हृदय सिकुड़ सा जाता है, 

तब बस आँसू की धारा है, तब बस आँसू की धारा है। 


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