STORYMIRROR

Harshita Srivastava

Drama

3  

Harshita Srivastava

Drama

उत्सव

उत्सव

1 min
269

पक्षी देखों गा रहे हैं

गीत गुनगुना रहे हैं

सरसों के पीले सुनहले

रंग जगमगा रहे हैं


शीत के जाने से 

वसंत के पदार्पण पे

सभी मन हर्षा रहे हैं

ऋतु ये मिलन की


त्योहारों की आई है

सभी अपनों के संग

उत्सव मनाने रहे हैं। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama