प्रेमजाल
प्रेमजाल
1 min
218
तेरा प्यार पल पल
मेरे साथ चलता है
सुबह सूरज सा
निकल सांझ ढलता है।
तू वो है जिसके लिए
मन मचलता है।
जैसे संगीत अब
सदाओं में बहता है।
ओह ये कैसी उलझी
उलझी लटें है।
जैसे बादल बिना
बारिश के बरसता है।
फिर कहां कोई जीता है
कहां मरता है।
हर शख्स जो किसी
प्रेमजाल में होता है।
