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Harshita Srivastava

Romance

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Harshita Srivastava

Romance

मन

मन

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हमें जहान से भला क्या

तुम मिले या ना मिले

अब तो मन मिल गया ना,

ग़म मिले या ना मिले

हंसते हुए जिन्दगी

गुजार दी है हमने भी,

खुशियों भरे पल तो

मेरे दर पर कम मिले।

तुमको कल देखा था 

मैंने बसंत की बहार सा

तबसे मन खुश खुश सा है

तुम मिले या ना मिले। 



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