STORYMIRROR

Harshita Srivastava

Romance

2  

Harshita Srivastava

Romance

मन

मन

1 min
144


हमें जहान से भला क्या

तुम मिले या ना मिले

अब तो मन मिल गया ना,

ग़म मिले या ना मिले

हंसते हुए जिन्दगी

गुजार दी है हमने भी,

खुशियों भरे पल तो

मेरे दर पर कम मिले।

तुमको कल देखा था 

मैंने बसंत की बहार सा

तबसे मन खुश खुश सा है

तुम मिले या ना मिले। 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance