उस पार
उस पार
अंतिम छोर तक पहुँचते हुए याद आया,
तेरे डूबते मन को वादे की इक पतवार दे दूँ।
तुम्हारी माँग सितारों से भले न भर सका,
पर तेरे दिल में तो आस का इक दीप धर दूँ।
कि भले उस पार जाकर तुम्हे मैं दिख न पाऊँ।
तुम्हारी और जग की आँखों से ओझल हो जाऊँ।
पर पनीली आँखों से तुम जब भी आकाश देखोगी,
भले ज़ुबान से न पुकारो पर भीगे दिल से याद करोगी।
मैं उस खुदा से लड़-झगड़कर भी तुम्हारे पास आऊँगा।
तुम्हारी गीली पलकें पोंछकर, मीठी मुस्कान सजाऊँगा।
कभी भी आजमा लेना मुझे,मैं वादा ज़रूर निभाऊँगा।
बस तुम सच्चे प्रेम से पगे हुए, दिल से पुकारना सनम।
मैं सैकड़ों बार जनम ले, उस पार से इस पार आऊँगा।
सुनो! मेरे जाने के बाद इक बार तो मुझे पुकार ही लेना।
वरना मैं उस पार भी कभी,सुकून से नहीं रह पाऊँगा।

