STORYMIRROR

Preeti Sharma "ASEEM"

Fantasy

4  

Preeti Sharma "ASEEM"

Fantasy

उदासी से परे

उदासी से परे

1 min
284

चाहे ! जिंदगी उदास हो

उदासी भरा दिन,

उदासी भरी एक लंबी रात हो

 वही जिंदगी की,

 चक्की पर चलती।


 दिन और रात के कामों की,

 हर दिन की तरह वही लिस्ट हो।


 चाहे ! जिंदगी उदास हो

 गलियों से गांव

 गांव से शहर

 फिर चाहे!!!!

 शहर से जंगल तक उदास हो।


 एक धुंध में पसरी हुई,

 जिंदगी की हर आस उदास हो।


 सुनना खामोशियों के शोर,

 और खुद से बात करना।

 भीड़ का तो

 हर इंसान अकेला है।

 फिर किस साथ के लिए उदास हो।


 मिलोगे ना जब तुम खुद से,

 हर तरफ उदासी दिखेगी।

 प्यास बाहर नहीं।

 तुझे तेरे भीतर ही मिलेगी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy