तूने मुझको यूँ छुआ है
तूने मुझको यूँ छुआ है
जैसे सर्द में दोपहर, जैसे अँधेरे में सहर,
तूने मुझको यूँ छुआ है जैसे पेड़ों की पत्तियों पर ओस जाती है ठहर.
जैसे बारिश की फुहार, जैसे नदिया में लहर,
तूने मुझको यूँ छुआ है जैसे तितली मतवाली हों मंडराती फूल पर.
जैसे वाणी में स्वरों और संगीत में राग का मिश्रण,
तूने मुझको यूँ छुआ है जैसे दिल को छू जाती धड़कन.
जैसे सूरज की आभा बढ़ाती रौशनी, चाँद को चूमे चांदनी,
तूने मुझको यूँ छुआ है, छू ना सका जैसे पहले कोई कभी.
जैसे साँसों की ज़रूरत है ज़िन्दगी जीने के लिए,
तेरी हसरत हैँ कुछ ऐसे ही मुझे अपने लिए.
सिसकियाँ लेते द्रवित हृदय को मिले शान्ति तेरी पनह में आकर,
तू इश्क़े दी वो चाशनी है, मिठास भर जातीं जीवन में जिसके शामिल होने पर.
वो जो तेरा कांधा है ना जिस पर सर रख कर एक अनोखे से सुकून का एहसास होता है,
आराम का सबब बन जाता है,जब आहत मन को शांत कर जाता है.
सुबह का आगाज़ तुझसे ही, हर शाम रंगीन तेरे होने से है,
हवा की संसनाहट में भी मिठास तेरी बोली की मधुरता से है.
साँसों से जुदा होकर जी भी लूँ पर तेरे बिन एक पल भी जीना अब लगता है नामुमकिन ,
जुदाई जो तुझसे हों गयी तो निश्चित ही जुदा हो जाऊँगी इस जीवन से उस दिन ...

