STORYMIRROR

Akanksha Gupta (Vedantika)

Romance

4  

Akanksha Gupta (Vedantika)

Romance

तुम मेरे हो

तुम मेरे हो

1 min
461

इस दिल के तन्हा एहसासों में

होठों पर आई सभी बातों में

आँखों के इन अधूरे ख़्वाबों में

आज भी तुम सिर्फ मेरे हो


बिखर गई जो याद फ़र्श पर

टुकड़े हुए हम आईने की तरह

ख़्वाहिशों के दरिया में उतरे

मैं शब हूँ तो तुम सवेरे हो


अश्क़ों का अलम ना पूछो

कितना सय्याल हुए है ये

सहर उल्फ़त की न आई

तुम गम के घने अँधेरे हो


दूर हो कर भी दूर नहीं

हम इतने मजबूर नहीं

ज़माने के कितने पहरे हो

दिल मे तो तुम मेरे हो.



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance