STORYMIRROR

Neha Prasad

Romance

4  

Neha Prasad

Romance

तुम कुछ इस तरहा मिल जाओ

तुम कुछ इस तरहा मिल जाओ

1 min
354

तुम मिल जाओ मुझे कुछ इस तरहा कि फिर कुछ और न मुझमें मिल पाए। 

जो देखे कोई मेरी ओर तो मुझमें सिर्फ तुम्हें ही पाए। 


मेरी हर बात तुमसे ही शुरू हो और तुम पर ही विराम पाए। 

तुम हो क्या हमारे लिए, ये हम आज तक न कह पाए। 


जीवन संगिनी हूँ तुम्हारी, काश तू दोस्त भी मुझमें पा जाए। 

जो बात किसी से न कह सकें तू, बातों बातों में मुझसे कह जाए। 


जो गम हो कुछ तुम्हें, मेरी बातें तेरे चेहरे पर मुस्कान ले आए। 

मेरी बनायी एक प्याली चाय, तेरी दिन भर की सारी थकान मिटा जाए। 


मेरे बनाए खाने में तुम्हें अपनी माँ के बनाए हुए खाने जैसा स्वाद आए। 

चाहे घूम आओ पूरी दुनिया तुम, पर लौट मेरे ही पास आए।


है मेरी यही प्रार्थना ईश्वर से, हर जन्म हम तुम्हें ही जीवनसाथी पाए। 

मेरी हर सुबह और शाम में तेरा ही चेहरा मुस्कुराए। 


बस तुम कुछ इस तरहा मुझे मिल जाए। 

हाँ, बस तुम कुछ इस तरहा मुझे मिल जाए। 


               ( एक पत्नी की मंशा) 

                


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance