STORYMIRROR

अमित प्रेमशंकर

Tragedy Inspirational

4  

अमित प्रेमशंकर

Tragedy Inspirational

तुम कहो अयोध्या वासी!

तुम कहो अयोध्या वासी!

1 min
13

तुम कहो अयोध्या वासी।


जन -जन के खातिर छोड़ महल 

प्रभु राम हुए वनवासी 

क्या भूल हुई क्या चूक हुई 

तुम कहो अयोध्या वासी ।।


अपना लहू बहा तुझ पर 

पग-पग पर लाज बचाई 

किया समर्पण निज जीवन 

पर तरस न तुमको आई।

फिर भी खुश थे, और विवश थे 

मेरे घट घट वासी ।

क्या भूल हुई क्या चूक हुई 

तुम कहो अयोध्या वासी ।।


एक अकेला खड़ा धनुर्धर

जनमत के सहारे थे।

अपने ही घर में रघुवर 

बस अपनो से ही हारे थे

नर सारे रावण बन बैठे 

नारी मंथरा दासी।

क्या भूल हुई क्या चूक हुई 

तुम कहो अयोध्या वासी ।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy