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निशान्त "स्नेहाकांक्षी"

Abstract

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निशान्त "स्नेहाकांक्षी"

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तुकांत हूं मैं!

तुकांत हूं मैं!

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जीवन की सड़क पर एक तुकांत हूँ,

सुरों की छांव में एक अल्प विराम हूँ।


हर मौखिक नृत्य का अंत मैं हूँ,

पर शब्दों की दुनिया में थोड़ा विलम्ब हूँ।


काव्य के अक्षरों में मैं निवास करता हूँ,

सुनहरे विचारों को संजोकर, एक ग़ज़ल की आस रखता हूं 


पल में गुजरता हूँ, बदलता हूँ,

इंद्रधनुषी बादलों के साथ आकर्षित होता हूँ।


विचारों की पंखुड़ियों से उड़ता हूँ,

अनगिनत अवसरों में बिखरता हूँ।


प्रेम की बारिश में डूबता हूँ,

विचारों के सागर में बहता हूँ।


दरवाज़े खोलकर दिल को छू लेता हूँ,

भावनाओं के रंगों में रंगता हूँ।


जीवन की सड़क पर एक तुकांत हूँ,

पर गीत की ढेरी पर आज भी थोड़ा विराम हूँ।


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