टूटा दिल करे पुकार
टूटा दिल करे पुकार
जनाजा जब मेरा उठे, तब तुम न आना
मेरे बदन को यूं कफ़न में लपेटे देख तुम
न घबराना
बहुत ही जद्दोजहद के बाद मुझे वो शान्ती
मिलेगी
तुम आके मेरे शव के पास आँसू न बहाना
जनाजा जब मेरा उठे, तब तुम न आना।।
रुकसते जिंदगी के चलन से थक सी गई हूं
बार बार अपने विश्वास को टूटता पा टूट
सी गई हूं मैं
कोई गुनाह न था मेरा, पर सजाए मुकद्दर पा
रूठ सी गई हूं मैं
अब तुझ से भी कोई चाहत नहीं रही मेरी
क्योंकि किसी और की तुझे आदत सी हो गई है।।
बस आरज़ू है इतनी मेरी, कर सके तो पूरी करना
जब कभी भी जनाजा मेरा उठे, तब तुम न आना
मेरे जिस्म को सिर्फ सफ़ेद कपड़ों से ढकना,
कोई भी सुहाग का सामान मेरे उपर ना चड़ाना
मुझे हँसते - हँसते विदा कर देना
चाहत रोटी कपड़े और मकान की न थी
वो मेरे पास भी था
चाहत प्यार और सम्मान की थी
जिसकी तेरे पास मुझे देने में कमी सी थी,
सोच थी मेरी एक घर संभालता है और
एक बाहर
मैंने तो अपने फ़र्ज़ बखूबी निभाए
पर तू अपने फ़र्ज़ निभाते - निभाते क्यों
दगा देता गया।।
मैं बेवकूफ़ न थी, बस तुझे चाहती थी
तेरी हर नादानी को माफ़ करती जाती थी
अब मुझे माफ़ करना, तुझे माफ़ मैं नहीं
कर पाऊंगी
मैं भी इंसान हूं कोई भगवान नहीं हूं
दर्द तकलीफ़ मुझे भी बहुत होती हैं,
अब ये सब तुझे जता भी कभी न पाऊंगी।।
तेरे लिए भी मैंने अपने सारे फ़र्ज़ निभाएं है
अब आगे निभाने की मेरी इच्छा नहीं,
एक दोस्ती और इंसानियत रहेगी हमारे बीच
और किसी रिश्ते को निभाने की अब इच्छा
नहीं।।
जनाजा जब मेरा उठे तब तुम न आना
मेरे बदन को यूं कफ़न में लपेटे देख तुम
न घबराना
जनाजा जब मेरा उठे तब तुम न आना।।

