ट्रेन का सफ़र
ट्रेन का सफ़र
सफर पर निकला पूरा परिवार हमारा
साथ थे तो लगा खुशियों की बरसात हो गई
कट रहा था सफर हंसते गाते मुस्कुराते
फिर बचपन के किस्सों की शुरुआत हो गई
रात का अंधेरा धीरे -धीरे बढ़ने लगा
बातों -बातों में पता नहीं कब आंख लग गई
ना जाने कब वो घटना दुर्घटना बन गई
देखते-देखते जाने कब वो काली रात बन गई
जिंदगी का सफ़र बीत रहा था खुशियों से
हाय हमारी खुशियों को किसकी नज़र लग गई
ट्रेन का पटरी से उतरने पर ये हादसा हुआ
लगा कि जैसे हमसे तो हमारी जिंदगी छूट गई
रेल का सफर कुछ ऐसे याद रहेगा न सोचा
ये खेल भी किस्मत का हमें कहाँ से कहाँ ले गई
ट्रेन का पहिया रुका अचानक से उस रात
हमारी हंसी और बातों का सफर वो साथ ले गई
सब बदलने के लिए वो घटना काफी थी
देखते-देखते ना जाने कब वो काली रात बन गई
बच्चे बूढ़े सभी बिलख बिलख रो रहे थे
अपनों के सपनों की खुशियाँ कहाँ ओझल हो गई
अपने बच्चों को अपने सामने मृत पाया
हाय हमसे हमारी तो पूरी दुनिया ही उजड़ गई।
