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Goldi Mishra

Tragedy Inspirational Others

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Goldi Mishra

Tragedy Inspirational Others

ठेकेदार

ठेकेदार

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दुनिया ने कितनी तरक्की करली,

पर ना इस समाज की फटी सोच का धागा मिला न सुई मिल सकी,

कुछ है इस समाज के ठेकेदार,

जिनकी सोच को नमन है बारम्बार,

सुनिए क्या कहता है ठेकेदार,

उम्र पच्चीस से पहले बिटिया को विदा कर दो,

जैसा चाहे खूंटा दिखे बछिया बांध दो,

जो उम्र बीत गई बिटिया की,

रिश्तों की कतार ओझल ना हो जाए कहीं,

किताबों में खोई नहीं,

घूंघट में गुम ही चाहिए,

लड़की ज्यादा बड़ी नहीं,

बस पच्चीस से कम चाहिए,

समाज ने दे दी रिश्ते और शादी पर दलीलें खूब,

शादी में फिर बेटी चाहे सुख भोगे या दुख,

हे! समाज के ठेकेदार,

थोड़ी सोच सुधार,

एक उम्र बीत जाती है सही कन्यादान करने में,

बिटिया के हाथ सिर्फ पीले नहीं जीवन स्वर्णिम करने में,

किस किताब के पन्ने ने कह दिया,

जो बिटिया कुंवारी है उसने समाज दूषित कर दिया,

मां बाप ने बिटिया की उड़ान को चुना,

घूंघट ब्याह खोखली रस्मों को त्याग दिया,

क्या गलत है यदि बाबुल ने बिटिया को खुला आसमान दे दिया,

कितने घर बिखरे पड़े है,

दुल्हन बनी बिटिया के पैर मायके लौटे है,

सम्मान बिटिया का तार तार कर,

त्याग दिया उसे बांझ और कुलटा कह कर,

कहा है शादी की वो रस्में,

वो  समाज के रीते,

ठेकेदारों की दलीलें,

बिटिया की मंजूरी उसकी मर्जी को फूटने दो,

सपनों को ब्याह की बेड़ियों में ना जकड़ने दो,

आईएएस, आईपीएस, और प्रधानमंत्री बन गई,

चांद को छू लिया हम बेटियां हर मुकाम जीत गई,

हार गई तो इस सोच के आगे,

शादी ब्याह और इन रिवाजों के आगे,

बिटिया के सपने उसकी मंजिल उसे चुन लेने दो,

ब्याह बंधन रिश्ते की डोरी उसके हाथ ही रहने दो



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