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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

तस्वीरें बहुत कुछ कहती हैं

तस्वीरें बहुत कुछ कहती हैं

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कुछ अवशेष पड़े हैं मन में,

चलचित्र बिखरे- बिखरे से , 

उन चलचित्रों को याद कर ,

अश्रु बूंद बन बिखर पड़े हैं, 

बंद पड़ी तस्वीरों में जाने कब से, 

धूल की परत चढ़ गई, 

धूल की परत हटाई तो ,

तस्वीर आंखों में उनकी छप गई I


लोप हो चुकी जीवन नैया, 

मुख मोड़ लिया है जीवन ने, 

एक कदम न चल सके साथ, 

थक गई अब तो जिंदगी, 

घिर गए जब अंधेरों में 

और कोई सूरत नजर आती नहीं, 

खुद ही आगे बढ़ना हमें ,

हर बार जिंदगी समझाती नहीं, 


कहते समय की आदत है, 

ये तो हर पल बदलता रहता, 

उलझी हुई जिंदगी कई बार ,

कुछ पल में सुलझ जाती है, 

यादों की छांव में मूक तस्वीरें भी ,

बहुत कुछ बोलती है, 

मौन राहों पर भी ,

हमें उम्मीद की किरण नजर आती है, 


सूने जीवन में व्यथा का भार, 

बढ़कर स्वप्न जब टूट जाता, 

गहन अंधकार के बाद, 

स्वर्णिम प्रभात लेकर कोई आता है, 

उलझन सुलझ जाती जीवन में ,

उम्मीद की किरण जगाता है, 

तस्वीर मूक होते हुए भी ,

हमसे बहुत कुछ कह जाती है I


कभी कर्तव्य तो कभी ,

अधिकारों के लालच में बंधकर, 

रिश्तों में उलझ जाती है, 

वो अश्कों के दामन भिगोकर ,

ख्वाहिशों के सागर में ,

उम्मीदों की कश्ती चलाती है, 


जाने कितनी ही इच्छाओं ,

और अभिलाषाओं के पीछे ,

दौड़ते हुए खुद को भुलाकर, 

मन के अंदर के एकांत को भूलकर, 

मोह -माया के धागों में सारी उम्र बिताती हैI


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