STORYMIRROR

swati Balurkar " sakhi "

Tragedy

3  

swati Balurkar " sakhi "

Tragedy

तलाश

तलाश

1 min
193

वो फुरसत के सुहाने पल

दिल आज भी ढूँढता रहता है !

तलाश है कुछ. .

कुछ खोया खोया सा है!

गुम हो गया है

तुम्हारा खयाल दिल से

आजकल!

व्यस्तता  

उभरने नही देती उसे!

तनाव और समय

पनपने नही देते हैं

तुम्हारे प्यार को!

गुम हो जाता है

खुश रहने का ख्याल भी

आजकल

चिंताएँ ,

प्रेम से भी 

महत्त्वपूर्ण हो गईं हैं

व्यस्त ज़िंदगी में भी

खालीपन का अवसाद सा है

कुछ तलाश तो है!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy