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christian saini

Romance Tragedy


5.0  

christian saini

Romance Tragedy


तेरे सामने ही तो खड़ी थी मैं

तेरे सामने ही तो खड़ी थी मैं

1 min 230 1 min 230

तस्वीर देख कर आज भी

अकेले में रो दिया करती हूँ

आज भी अलमारी से तेरी

कमीज़ निकाल के

देख लिया करती हूँ


उसमे तेरे इत्र की खुश्बू

आज भी आती है

जो हर बार तेरे आसपास

होने का एहसास दे के जाती है

कब्र पे तेरी हर रोज

आया नहीं करती

रो-रो के अपना वक़्त

जाया नहीं करती,


उस दिन आखिरी रात थी तेरी

जब चैन से तू सो गया और

वहां बेचैन मैं खड़ी थी


पता नहीं था क्यूँ तूने वो

आखिरी बार आँख खोली थी

तुझे पता था क्या तेरे सामने

ही तो मैं खड़ी थी

होश नहीं था तुझे फिर भी

नाम मेरा सुन के ऊँगलीयाँ

जो हिलायी थी


बहुत मुश्किल से आँसू रोक कर

तुझे पुकारा था फिर भी कुछ

कहे बिना मेरी जान मुझसे ही

दूर चली थी

तुझे पता है क्या तेरे सामने ही

तो मैं खड़ी थी


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