STORYMIRROR

Rajeev Tripathi

Abstract Romance

4  

Rajeev Tripathi

Abstract Romance

हसरतें

हसरतें

1 min
328

दिल से जाती नहीं तुम्हारी याद ऐसी

गुज़ारा मुश्किल है तन्हाई ये कैसी

तुम जफ़ा हो तुम्हें मालूम नहीं

दिल टूटने की कभी

आवाज़ आती ही नहीं


वफ़ा का सिला तुम उनको दे देना

जो बेज़ुबान हैं कुछ कह पाते हीं नहीं

अब तो दुनिया से प्यार जाता रहा

आने को कुछ नहीं है

लौटकर हसरतें आती ही नहीं 


हमारे सीने में भी दिल धड़कता है

रोज़ मरने की वह ताकीद करता है

तुम्हारे ग़म अब तो सहे जाते ही नहीं

मेरी इक आवाज़ पर लौट कर आ जाओ

तन्हा हमारा वक्त गुज़रता ही नहीं


तुम्हारी बेवफ़ाई का हमें मलाल नहीं

तन्हा तुम ही नहीं हो जो

रखे ख़्याल ही नहीं

ज़रूरत पड़ेगी तुम पर

जब होंगे ख़्याल में हम ही

जब पूरा कर लेंगे इंतक़ाम 


अगर ये है तो यूँ हीं सही 

प्यार सबको सुकून देता है

मेरे प्यार को भी तुम आज़माना

पूरे जीवन में चाहे एक बार ही सही।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract