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Romance

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मोह गली (Moh Gali)

मोह गली (Moh Gali)

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औरों ने कितना‌ चाहा पर,

मोह की इस संकरी गली को आज तक,

कोई और छू ना पाया है।

कितने आए, और कितने गए,

पर कोई भी वैसा प्रेम का तोहफा –

अपने संग ना ला‌ पाया है,

बादल गरजा, अंबर बरसे –

पर वह मुरझाया फूल,

तो अभी-भी ना खिल पाया है।

दिन-महीने बीत गए परन्तु,

उसकी आंखों से मिले स्नेह के संदेश को –

मेरा दिल भूला ना पाया है,

हर लिया है –

उसने मेरा चैन,

उसके अलावा –

कोई भी इस तंग प्रेम गली में,

अब-तक दाखिल न हो पाया।

औरों ने कितना‌ चाहा पर,

मोह की इस संकरी गली को आज तक,

कोई और छू ना पाया है।


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