तकदीर लिखों हथेली पर
तकदीर लिखों हथेली पर
कोई नहीं हैं इस जमाने में
अकेला आया हैं
अकेला ही जायेगा
जो करोगे,
वही पाओगे !
और सब रह जायेगा
सफ़र देखो!
सफ़र के राह देखो,
पर सामने देखो !
मुड़कर तुम मत देखो,
कोई तुम्हारे पीछे आने वाला नहीं हैं
सब हैं अपने- अपने
जिन्दगी को तुम फूल बनाओ
संघर्ष करना सीख जाओ
अपने हाथों से लिख दो,
अपनी तुम तकदीर !
जिन्दगी हैं,
तो कुछ करो !
ये सब लगा रहता हैं
जहाँ काँटे वहाँ फूल
जहाँ खुशी वहाँ ग़म
आते- जाते पानी की तरह है
ढलती जवानी की तरह हैं।
तब क्यूँ बैठ जाएँ मुँह लटकाकर
कुछ तो कहे,
हौसला रखें और गगन को छू ले!
परिश्रम ही तुम्हारी जीत
और झूठा तो संसार हैं
जहाँ स्वार्थ हैं वहाँ प्यार हैं
और जहाँ प्यार हैं वहां स्वार्थ हैं
तब क्यूँ हाथ बाँधकर बैठ जाएँ
तकदीर लिख दे अपनी हथेली पर !
