STORYMIRROR

Rishab K.

Abstract Classics Inspirational

3  

Rishab K.

Abstract Classics Inspirational

तेरी मंजिल

तेरी मंजिल

1 min
212

यूं लाचार ना कर खुदको,

थोड़ी सी हिम्मत कर,

जिंदगी जीनी है तो,

फिर नये से शुरुआत कर,


हारते तो सब है,

तू फिर से उठने की कोशिश तो कर,

फिर से चलना शुरु कर,

'तेरी मंजिल की ओर।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract