तेरे प्यार की डोर
तेरे प्यार की डोर
मेरे श्याम
हर रोज बहक जाते हैं मेरे कदम
और खुद ब खुद चल पड़ते है
आपके दर पर आने के लिये
अब ना कोई फ़ासले हैं
अब ना कोई दूरी है
ऐसी है तेरे प्यार की डोर
मैं ऐसे बँधी आपके प्यार में मेरे श्याम
आपसे प्रेम के द्वार अनेक हो गए
यूँ ही मिलते रहे वृन्दावन की गलियों में
कब आप और मैं एक हो गए
मेरी पहचान अब मेरे बिहारी हो गए ।

