STORYMIRROR

Dr. Chanchal Chauhan

Romance

4  

Dr. Chanchal Chauhan

Romance

तेरे प्यार की डोर

तेरे प्यार की डोर

1 min
359

मेरे श्याम  

 हर रोज बहक जाते हैं मेरे कदम

और खुद ब खुद चल पड़ते है

आपके दर पर आने के लिये

अब ना कोई फ़ासले हैं

अब ना कोई दूरी है

ऐसी है तेरे प्यार की डोर 

मैं ऐसे बँधी आपके प्यार में मेरे श्याम

आपसे प्रेम के द्वार अनेक हो गए

यूँ ही मिलते रहे वृन्दावन की गलियों में 

कब आप और मैं एक हो गए

मेरी पहचान अब मेरे बिहारी हो गए ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance