STORYMIRROR

Mamta Gupta

Romance

4  

Mamta Gupta

Romance

तेरे मेरे दरमियां

तेरे मेरे दरमियां

1 min
162


तेरे मेरे दरमियां न जाने कब एक रिश्ता बन गया..

दोस्ती के सफर में न जाने कब हमसफ़र बन गया..


पता नहीं कब और कैसे गलतफहमियां बढ़ गई...

छोटी-छोटी सी बातें क्यों राई का पहाड़ बन गईं..


कुछ अधूरे ख्वाब न जाने क्यों पूरे न हो  सके..

बिन कहे दिल की बात न जाने क्यों न समझ सके..


अधूरी कहानी पर खामोश अब लबों का पहरा हैं..

शब्दों की चोट रूह पर लगी, इसलिए दर्द गहरा है..


अपने ही देते दर्द, दर्द गैरों ने दिया होता कोई बात नहीं..

दर्द भी अपना है, दर्द दवा भी अपना है कोई बात नहीं..


तेरे मेरे दरमियां रिश्ते में अब फर्क बस इतना है..

तू अभिमान में 'जी' रहा, मुझे रिश्तों में जीना मरना है..



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance