तैयारी मेरी है
तैयारी मेरी है
क्यूं तड़पा रही है मुझको तू,
मेरे मन में याद तेरी ही है,
मोसम बड़ा सुहाना है सनम,
तुझे मिलने की तमन्ना मेरी है।
बार बार छूपती रहती है तू,
एसी क्या तेरी मज़बूरी है,
अब दुनिया ड़र छोड दे सनम,
सब से लडने की तैयारी मेरी है।
झांककर देखले मेरे दिल में तू,
दिल में तस्वीर सिर्फ तेरी है,
दौड़कर मेरे पास आजा सनम,
दिल में समाने की तमन्ना मेरी है।
मेरे इश्क का इजहार कर ले तू,
मेरे लब पर पूकार तेरी है,
इश्क की ज़ाम छलकाउंगा "मुरली",
मदहोंश करने की तैयारी मेरी है।
रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ)

