ताज ए दीदार
ताज ए दीदार
कभी दोनो ने सोचा था
साथ करेंगे ताज ए दीदार
कभी हाथों में हाथ लिये
साथ करेंगे ताज ए दीदार
ख्वाब बड़ा हसीन था
ख्वाब ही बनकर रह गया
हकीकत के दरमियां
सब कुछ बिखरकर रह गया
इश्क को इबादत बनाकार
साथ करेंगे ताज ए दीदार
कभी दोनो ने सोचा था
साथ करेंगे ताज ए दीदार
कुछ आरजू हमारी थी
कुछ जुस्तजू तुम्हारी थी
दो राहगीरों के बीच का
कारवां अधूरा रह गया
महोब्बत को रूह में बसाकर
साथ करेंगे ताज ए दीदार
कभी दोनो ने सोचा था
साथ करेंगे ताज ए दीदार।
