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Rajeev Rawat

Abstract Inspirational

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Rajeev Rawat

Abstract Inspirational

ताबूत - - दो शब्द

ताबूत - - दो शब्द

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जिन्दगी में

श्वासों की रिदम् 

जीवन के मूल्य बदल देती है-

एक एक श्वास 

जीवन के धड़कनों को

अहसासों की आवृत्ति देती है--

और

वही श्वास

जब रूक कर अपने अस्तित्व का

अहसास कराती है-

कि हे जीव जंतु तुम्हारा इतराना

गर्व में खो जाना और अपने आप को खुदा समझने की भूल करना, 

मेरे बिना कुछ नहीं है मूल्य बताती है-


यह

मन न जाने 

कितना नाच नचाता है-

और अधिक पाने की चाहत में

शरीर को 

बेदर्दी से खपाता है-


ताबूत 

दो तरह के होते हैं

एक जो आत्मा से विलग अस्तित्व को 

सुपुर्द - ए-खाक करने के लिये ले जाता है कब्र तक--

दूसरा होता कुंठित विचारों का ताबूत 

जो जीते जी सीमा रेखा में

बांध देता व्यक्ति और व्यक्तित्व को 

उसके आखिरी सब्र तक--


शरीर कितना भी यत्न कर ले

एक दिन यूं पड़ा होगा 

खोकर अपनी अस्तित्व बेजान सा

बिखर जायेगा टुकड़ों में 

रह न पायेगा साबूत-

तुम्हें तुम्हारी अंतिम यात्रा का 

एक अवलम्ब बन कर मिट्टी में मिलाने से पहले अपने आगोश लेकर 

तुम्हारी महानता के अहंकार को तोड़ता

ताबूत - 



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