स्वाबलंबी बनो
स्वाबलंबी बनो
स्वावलंबी बनोगे
सुखचैन जीवन में भरोगे।
दूसरों के आश्रय रहोगे तो ना जिओगे और ना ही मरोगे।
औरों के लिए तो छोड़ो तुम अपने लिए ही कुछ ना करोगे।
स्वावलंबी बनोगे और जब मेहनत तुम करोगे,
आत्मविश्वास खुद में जगेगा और तुम्हारा कोई भी काम ना रुकेगा।
हर दिन तुम पहले दिन से आगे ही बढ़ोगे।
सफलता की नित नई ऊंचाइयां चढ़ोगे
स्वाबलंबी बन कर सम्मान से जिओगे।
केवल घर का ही नहीं देश का भी मस्तक झुकने नहीं दोगे।
स्वावलंबी बनोगे सुखचैन जीवन में भरोगे
हाथ नहीं फैलाओगे किसी के भी सामने
अपने जीवन के फैसले भी तुम खुद ही करोगे।
स्वाबलंबी होकर अपने जीवन में तुम अपनी ही पसंद के रंग भरोगे।
स्वाबलंबी होना बहुत जरूरी है।
आलस्य को दूर भगाओ और अपने कामों में मन लगाओ।
जीवन में जब तुम किसी के भरोसे नहीं रहोगे
तो सुखचैन खुद के जीवन में खुद ही भरोगे।
