STORYMIRROR

Debashis Bhattacharya

Romance

4  

Debashis Bhattacharya

Romance

सपने में तुम कितने सुन्दर

सपने में तुम कितने सुन्दर

1 min
302

सपने में तुम कितने सुन्दर

रहते हो क्यों दूर

तुम्हारी झलक देखते ही मेरा

ह्रदय में खिलते है गुल 


निगाह तुम्हारी इतनी मिठास

मिटाती मन की प्यास

मेरे पास तुम आते ही

सपना हो जाता साकार


तुम्हे सामने देखकर मैं

खुद को कहीं खो देता

आँखे तुम्हारी रूप देखकर

मैं हो जाता हूँ दिलबर


दिल की धड़कने आवाज उठाते

पर बोल नहीं पता

मन मेरा काबू में न रह्कर

तुम्हारी दिल को छूना चाहता


तुम मेरे हो, मैं तुम्हारा हूँ

प्रवाहमान नदी की लहरें हूँ

बहता रहता इस आशा से

मिलेंगे सागर में जरूर प्यार से।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance