STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Abstract

4  

Shailaja Bhattad

Abstract

सँवारे

सँवारे

1 min
22.8K

सूरज की रोशनी में 

जुगनुओं को कैसे चमकाएं। 


बेपरवाही में तकदीर

कैसे बुलंद बनाएं। 


गुमराह होती राहों

को कैसे सँवारे। 


ख्वाहिशों को धरातल

पर कैसे उतारें।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract