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Hem Raj

Inspirational

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Hem Raj

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संसार ही स्वर्ग बन जाता

संसार ही स्वर्ग बन जाता

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काश ! सासें बहुओं को बेटी ही मानती,

बहुएं सासों को मनाने लग जाए माता।

क्या जरूरत थी तब भिस्त की चाह की ?

फिर तो यह संसार ही स्वर्ग बन जाता।


बाप - बेटे, भाइयों को पत्नियां न लड़ाए,

दोस्त सा व्यवहार करने लगे हर भ्राता।

घर की बहुएं - बेटियां बहनों सी रहे सब,

फिर तो यह संसार ही स्वर्ग बन जाता।


बहुओं को न सताए हम और बेटे हमारे,

बेटियों को न सताए ससुराल - जामाता।

हर रिश्तों में प्यार ही प्यार फैल जाए तो,

फिर तो यह संसार ही स्वर्ग बन जाता।


 काश ! पड़ोसी से कोई पड़ोसी न लड़ता,

 ईर्ष्या, राग, द्वेष का भाव खत्म हो जाता।

 मोह, ममता, नफरत की दीवारें गिर जाती,

 फिर तो यह संसार ही स्वर्ग बन जाता।


रहते न रोग - शोक, दम्भ, आधी और व्याधि,

न रहता झगड़े का हेतु जोरु, जमी और बुढ़ापा।

सबके घरों में रहती बराबर सी सुविधाएं तो,

फिर तो  यह  संसार ही स्वर्ग बन जाता।


सर्पणी सा न लीलती निज जाए को जननी,

पिता पर नारी के झांसे में सुत को न भुलाता।

बहु - बेटे न ठुकराते अपने ही मां - बाप को तो,

फिर  तो यह  संसार  ही स्वर्ग बन  जाता।


रंग भेद, जाति -धर्म के सब झगड़े ही मिट जाते,

आता न अजीवन किसी को इस जग में बुढ़ापा।

दया, करुणा, सहजता, सरलता सब में फैल जाती,

तो फिर तो यह संसार ही स्वर्ग बन जाता।


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