VIVEK ROUSHAN
Tragedy
जिस समाज में बहुसंख्यक
वर्ग जुल्म, अन्याय, अत्याचार
के खिलाफ चुप्पी साध लेता है,
वो समाज जिन्दा दीखता तो है
पर असल में वो मर गया होता है !
खुदा हो जाए
सजा नहीं सकता
प्यार क्या कर...
उसे ही याद कर...
हम भूलते कै...
घर के ना रह
भुलाया भी नही...
अपने शहर जाते...
रोज़ पुकारा कर...
सुनता कोई नही...
तुम्हारे तमाशे अब नहीं लुभाते तुम्हारे नाटकों से ऊब चुका है मन। तुम्हारे तमाशे अब नहीं लुभाते तुम्हारे नाटकों से ऊब चुका है मन।
तुम स्वतंत्र हुए, सभ्य नहीं तुम पढ़ लिख गए, बुद्धिमान नहीं। तुम स्वतंत्र हुए, सभ्य नहीं तुम पढ़ लिख गए, बुद्धिमान नहीं।
क्या बताएं क्या छुपाएं, क्या क्या नहीं है जग में देखा। क्या बताएं क्या छुपाएं, क्या क्या नहीं है जग में देखा।
अह्सास मर चुके हैं प्रेम, श्रद्धा, विश्वास, शर्म बाजार की भेंट चढ़ चुके हैं। अह्सास मर चुके हैं प्रेम, श्रद्धा, विश्वास, शर्म बाजार की भेंट चढ़ चुके ...
जाने कब और कहाँ खो गए अपनापन संबंध पुराने। जाने कब और कहाँ खो गए अपनापन संबंध पुराने।
ऐसे ही छोड़ता रहा तो मिलने से रहे मेडल होने से रहा प्रमोशन. ऐसे ही छोड़ता रहा तो मिलने से रहे मेडल होने से रहा प्रमोशन.
हवन कुंड में कामनाओं की आहुति देता रहा सतत। हवन कुंड में कामनाओं की आहुति देता रहा सतत।
विकास के नए मानक निगल रहे बाग बगीचों का अस्तित्व। विकास के नए मानक निगल रहे बाग बगीचों का अस्तित्व।
लोक संस्कृति के पैरोकारों का चमकदार कृत्य पिघलते बर्फ पर उकेरे भविष्य। लोक संस्कृति के पैरोकारों का चमकदार कृत्य पिघलते बर्फ पर उकेरे भविष्य।
आजकल अफवाहों के बाजार गरम है। जिसे देखो,उसे खुदा होने का भरम है। आजकल अफवाहों के बाजार गरम है। जिसे देखो,उसे खुदा होने का भरम है।
जहां हर कोई भगवान से डरता हो, और भगवान अपने भक्तों से। जहां हर कोई भगवान से डरता हो, और भगवान अपने भक्तों से।
करें चरितार्थ तब अपना हाथ जगन्नाथ, पहचान दें धंधे को अपने हुनर के साथ। करें चरितार्थ तब अपना हाथ जगन्नाथ, पहचान दें धंधे को अपने हुनर के साथ।
उजाले तुमने मेरे जब से लिए अंधेरों से हमको उल्फत हो गई। उजाले तुमने मेरे जब से लिए अंधेरों से हमको उल्फत हो गई।
आपस में था प्रेम सदा ,ईदी सब से लेते थे ! पंडित, मौलवी, पादरी ,हमें शिक्षा मंत्र देते आपस में था प्रेम सदा ,ईदी सब से लेते थे ! पंडित, मौलवी, पादरी ,हमें शिक्षा मं...
कोई जी रहा है जिंदगी , कोई काट रहा है इसको, कोई जी रहा है जिंदगी , कोई काट रहा है इसको,
ताकि साँस लेने के लिए उन्हें मास्क पहनना पड़े एक ऐसा हिन्दुस्तान दे जाओगे ताकि साँस लेने के लिए उन्हें मास्क पहनना पड़े एक ऐसा हिन्दुस्तान दे जाओगे
यहां कहां मिलेंगे तुम्हें प्रेम पुष्प गलत राह आ गए। यहां कहां मिलेंगे तुम्हें प्रेम पुष्प गलत राह आ गए।
यदि ये यदि की नदी न बहती तो आज धरती कुछ और ही होती। यदि ये यदि की नदी न बहती तो आज धरती कुछ और ही होती।
मौत भी काल से गले मिलकर तांडव करने लग जाती है। मौत भी काल से गले मिलकर तांडव करने लग जाती है।
पर परमात्मा तूने डाल दिया कैसी डगर है? दिख न रही मुझे कोई भी मंजिल किधर है पर परमात्मा तूने डाल दिया कैसी डगर है? दिख न रही मुझे कोई भी मंजिल किधर है