VIVEK ROUSHAN
Tragedy
जिस समाज में बहुसंख्यक
वर्ग जुल्म, अन्याय, अत्याचार
के खिलाफ चुप्पी साध लेता है,
वो समाज जिन्दा दीखता तो है
पर असल में वो मर गया होता है !
खुदा हो जाए
सजा नहीं सकता
प्यार क्या कर...
उसे ही याद कर...
हम भूलते कै...
घर के ना रह
भुलाया भी नही...
अपने शहर जाते...
रोज़ पुकारा कर...
सुनता कोई नही...
तुझे देखने को तरसें मेरी निगाहें, बार-बार मरना प्यार में मेरी फितरत नहीं है। तुझे देखने को तरसें मेरी निगाहें, बार-बार मरना प्यार में मेरी फितरत नहीं है।
दो लोगों की चाहत अपनों से दूर ले जाती है, वो प्यार परिवार समाज खण्डन कहलाता है। दो लोगों की चाहत अपनों से दूर ले जाती है, वो प्यार परिवार समाज खण्डन कहलाता ह...
पेट के खातिर आदमी घर से निकलता है, कड़ी मेहनत और मीलों पैदल चलता है। कई मोड़ मुड़ता, दरवाजे खटखट... पेट के खातिर आदमी घर से निकलता है, कड़ी मेहनत और मीलों पैदल चलता है। कई मोड़...
भले मैं दूर हूं तुझसे तू मुझसे दूर है कितनी, पर दिल से मुझे अपनाया दिखाई देता है। भले मैं दूर हूं तुझसे तू मुझसे दूर है कितनी, पर दिल से मुझे अपनाया दिखाई देता ...
गंगा सी धार आँखों से उसकी बही थी !! न जा लाल मेरे, बार / बार कही थी गंगा सी धार आँखों से उसकी बही थी !! न जा लाल मेरे, बार / बार कही थी
हमने भी तो भीतर दबा रखा बड़ा दम हम भी तो शोले में हँसनेवाले हैं, शबनम। हमने भी तो भीतर दबा रखा बड़ा दम हम भी तो शोले में हँसनेवाले हैं, शबनम।
मत बन ज़माने में तू इतनी बेरहम साखी, ज़माने में इतने गुनहगार तो हम भी न थे। मत बन ज़माने में तू इतनी बेरहम साखी, ज़माने में इतने गुनहगार तो हम भी न थे।
ईमानदार शख्स कहला रहा चोर है फिर भी साखी लगाना तू जोर है ईमानदार शख्स कहला रहा चोर है फिर भी साखी लगाना तू जोर है
समझी ना किसी ने चाल समय की ना बता सके भविष्यवाणी प्रलय की समझी ना किसी ने चाल समय की ना बता सके भविष्यवाणी प्रलय की
दो पल की है जिंदगानी, एक पल का सहारा हूँ मैं। दो पल की है जिंदगानी, एक पल का सहारा हूँ मैं।
माता-पिता की सेवा करने से तो, बंद चराग भी रोशन हो जाता है। माता-पिता की सेवा करने से तो, बंद चराग भी रोशन हो जाता है।
ओढ़ ली है गम की चादर मैंने, खुशियां क्या होती हैं मैं भूल गई। ओढ़ ली है गम की चादर मैंने, खुशियां क्या होती हैं मैं भूल गई।
एक प्रेम ही है जहाँ अच्छे से अच्छा भी मात खा जाता है। एक प्रेम ही है जहाँ अच्छे से अच्छा भी मात खा जाता है।
दर्द वो नहीं झेलते जो चले जाते हैं, दर्द वो झेलते जो यहां रह जाते हैं। दर्द वो नहीं झेलते जो चले जाते हैं, दर्द वो झेलते जो यहां रह जाते हैं।
शोषण का घूंट पीकर स्वयं को रोज कोसती रही कौन सुनता है, कौन देखता है ? शोषण का घूंट पीकर स्वयं को रोज कोसती रही कौन सुनता है, कौन देखता है ?
अपनों से मुंह छुपाकर कई बार रोई है जिंदगी नाजुक कंधों पर जिसने उम्र भर ढ़ोई है जिंदगी अपनों से मुंह छुपाकर कई बार रोई है जिंदगी नाजुक कंधों पर जिसने उम्र भर ढ़ोई ...
हर हाल में अपनों के लिये मुझे, तेरे गम से मुझे निकलना होगा। हर हाल में अपनों के लिये मुझे, तेरे गम से मुझे निकलना होगा।
सामने दीवार पे सुकून की घड़ियों वाली, घड़ी को रखा मेरी पहचान को निखारने वाला आईना लगा सामने दीवार पे सुकून की घड़ियों वाली, घड़ी को रखा मेरी पहचान को निखारने वाला...
खुद के घर में पर्दे लगाकर ओरों के घरों में ताक- झाँक खुद के घर में पर्दे लगाकर ओरों के घरों में ताक- झाँक
न दर्द से हो वाकिफ़ न दिल्लगी से, दाग और दामन की सर जमी में, न दर्द से हो वाकिफ़ न दिल्लगी से, दाग और दामन की सर जमी में,